Friday, January 16, 2009

हिट कवि बनने के नुस्खे

हिट कवि बनने के नुस्खे

कविता के वायरस से इनफेक्टेड रचनाकारों, इस रोग के वायरस को पहुंचा दो पीक पर क्योंकि अपुन हाजिर है हिट कवि बनने के पोयट्रोपेथिक नुस्खों के साथ. तो पेश-ए-खिदमत हैं टॉप टेन सुपरहिट मंचीय टिप्स. - सबसे पहले अपने बॉडी लुक पर चिंतन करें. सिंगल पसली, क्लीनशेव, मधुरवाणी वाले प्राणियों पर श्रृंगार रस, मुच्छड़ व एट पैक एब्स वाले लोगों पर वीर रस एवं थुलथुल व फैटी शेप शरीर पर हास्य व्यंग्य फबता है. सो कहां स्टैंड करते हैं भाई, ज़रा गौर कर लें. - आयोजक महकमे में सेंधमारी का हुनरमंद बंदा मंच फौरन तलाश लेता है. इस काम के लिए आयोजकों की डायरेक्टरी बनाकर अपडेट करना, उनकी पत्नियों को उनके जन्मदिन पर टेस्टानुसार गिफ्ट वगैरह कोरियर करते रहना चाहिए. रचना में दम हो न हो, लेकिन अगर चढ़ावा दामदार है तो आप कवि सम्मेलन में शान से शिरकत करते दिखेंगे. - स्वयं की कैप्टेंसी में कवि टीम गठित करें. कमनीय कुंवारी कवियत्रियों को तरजीह दें. इनके चंचल चौके ऑडियंस को चौका देंगे साथ ही टीम हेतु स्टेज ड्राइव भी साबित होंगे - मंचासीन होते वक्त सावधानी बरतें. अध्यक्ष व मुख्य अतिथि के इर्द-गिर्द मंडराते हुए अंतत: उनके बगल वाला स्थान कब्जिया लें. कॉर्नर कवि अकसर कैमरे की ऩजरों से कट जाते हैं, जबकि सेंट्रल प्वाइंट कवि न्यूजपेपर की फोटो में ऩजर आते हैं. - मंच संचालक को पटाकर रखने से फायदा यह है कि वह आपके सम्मान में शेर, मुक्तक वगैरह फेंककर कविता वाचन हेतु उस टाइम बुलायेगा, जब मंच ऊंचाइयों पर और श्रोता फुल मूड में हों. मंच पर नुक्ताचीनी, कमेंटबाजी इत्यादि पॉपुलर क्रियाकलापों को ब्रिलिएंटली अंजाम दें. -माइक संभालते ही जबर्दस्ती खुद के सम्मान में जोरदार तालियां बजवाकर श्रोताओं को प्रेशर में ले लें. किराये के कुछ तालीबाज श्रोताओं के बीच चारों दिशाओं में बिठा दें जो आपकी हर पंक्ति पर भरपूर ताली बजाकर वाह-वाह का सुर अलापें. उन्हें निर्देश दे दें कि ये भाड़े के लोग आपकी कविता का द एंड होते ही दूसरी रचना की फरमाइश कर आपको जमाने में कोई कसर न छोड़ें. - चुटकुलों की दो-चार किताबें कंठस्थ कर लें. मौसम के अनुकूल चुटकुलापरक कविता सुना वाहवाही लूटिए. लैंग्वेज कैसी भी हो चलेगी पर बॉडी लैंग्वेज के साथ समझौता बिलकुल मत कीजिए. इससे पहले की शातिर साहित्यिक मसखरे आपकी कविता के भावों को अपने शब्दों में ढाल कबाड़ा कर दें, तनिक मसखरी भी सीख ही डालिए. कवि सम्मेलनों में अपनी टेंडेंसी के अनुसार स्वयं का सम्मान करवायें. सम्मान की राशि का बैंक ड्राफ्ट संयोजक महोदय को एडवांस में भेज दें, कमीशन के साथ. प्रशस्ति पत्र, प्रतीक चिह्न, अंगवस्त्र आदि साथ में लेकर पधारें. सम्मान पत्र स्वयं कंपोज करें बस सिगनेचर वाली जगह खाली छोड़कर. डियर कवियों, कैसे लगे इस खाकसार के ये लेटेस्ट नुस्खे. इनके बेनिफिट्स उठाइये और बन जाइये सुपरहिट कवि
पंकज प्रसून दिनांक-१६ जनुअरी

Tuesday, December 30, 2008

एक्सपर्ट निंदक

एक्सपर्ट निंदक
सोशल सेक्टर में प्रोफेशनलों एवं स्पेशलिस्टों की बूम के साथ ही निंदा के क्षेत्र में भी एक्सपर्टाइजेशन जरूरी हो चला है. कुशल गांधीगीर निंदक, सत्य-अहिंसा के बलबूते समाज की मेन स्ट्रीम में इंट्री मार ही लेता है. आयडियल निंदक तिल को ताड़ और ताड़ को तिल इजिली बना देता है. हथगोले की फुस्स को, हैंडग्रेनेड की धड़ाम में कनवर्ट करने का हुनर हो या अंतरराष्ट्रीय मुठभेड़ों को कल्लू-कल्लू की चुहलबाजी में तब्दील करना, परफेक्ट निंदक का माइंड हजार जीबी रैम वाला एवं निगाहें माइक्रोस्कोपिक होती हैं. अनलिमिटेड जूम के साथ जो वस्तु को उसकी कंप्लीटनेस एवं हर एंगल से देखती है. इतना टेक्निकल होने के बावजूद एक्सपर्ट निंदक का दिल निहायत भावुक होता है. मसलन हत्या, आत्मदाह, डकैती की निंदा के टाइम आंखों में नमी, विपक्ष की निंदा करते समय आक्रामकता, आतंकी घटना की निंदा करते वक्त वादों को फुल स्पीड में भड़काने माफिक विशेष क्रियाकलापों के महारथी होते हैं. वैदिक कालीन नारदीय निंदक पलायनवादी होते हैं, जबकि मुंहफट निंदक टिकाऊ एवं ड्यूरेबल होता है जो निंदा के स्वरूप को व्यापक एवं दायरे को यूनिवर्सल बनाता है. लफ्फाज निंदक बनने के लिए स्ट्रांग प्रेजेन्स ऑफ माइंड एवं लेखकीय निंदक हेतु कलमतोड़ सिंसियरिटी का होना बहुत जरूरी है. निंदकावस्था में तल्लीन महानुभाव देखते ही देखते महापुरुष प्रदर्शन एवं नारेबाजों की चिल्ल-पों पर एक एक्सपर्ट ट्रेंड निंदक ही भारी पड़ता है जो बिना बवाल काटे महा बवाल खड़ा कर देता है. प्रखर निंदक, दकियानूस और घिसे-पिटे सामाजिक, आर्थिक, राजनैतिक मुद्दों को निंदा का विषय नहीं बनाता अपितु विविध न्यू सब्जेक्ट्स की सर्च एवं मॉडीफाइंग कैपेसिटी का प्रयोग कर आउटडेटेड सब्जेक्ट को रीजेनरेट कर भरपूर आउटपुट का लुत्फ उठाता है. उसे निंदा के मानकों की परवाह कहां? सरे बाजार निंदा, बात न बनी तो जूता मार निंदा, अगर निशाना चूक भी गया तो विस्तार निंदा का ही होता है. मसलन, चूके हुए निशाने की निंदा, निशानेबाज की निंदा, असहनीय प्रहार से बचने वाले सहनशील की निंदा तमाशबीनों की निंदा आदि. बहरहाल ऐसे निंदक को नाम तो मयस्सर होता ही है साथ ही जूतों का दाम भी. निंदा करने और करवाने के नायाब नुस्खों का कॉपीराइट तो कुछ निंदक पुरोधाओं के पास एकदम सेफ है. बेरोजगारी और मंदी के दौर में युवाओं को इन निंदक गुरुओं के शरणागत होकर शॉर्ट टर्म ट्रेनिंग कर लेनी चाहिए. जिससे युवा बेहतरीन निंदा का कांट्रैक्ट ले इसे ऐज अ करियर एडॉप्ट कर सकें. अगर आपने अभी तक निंदागीरी स्टार्ट नहीं की है, तो धीरे-धीरे खुद को स्थापित करने की जद्दोजहद में मशगूल हो जाइये. निंदक नियरे राखिये नहीं, बल्कि इसकी नियरता में इजाफा कर निंदक गले लगाइये. आखिर एक्सपर्ट निंदक आपके निंदनीय कृत्य को चार चांद जो लगा देता है. ऐसे निंदकाधिराजों पर देश को नाज है. तो भइया डिग्री-विग्री हथियाने के साथ-साथ इस विधा पर भी ध्यान दो. एक तो निंदा रस का आनंद बहुत मधुर है दूसरे इसके प्रोफेशनल फायदे भी बहुत हैं. जय हो निंदा देवी की. पंकज प्रसून